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Posts Tagged ‘Devnaagri’

Another beautiful song from the stable of Kishore Kumar. Lyrics, in Hindi for your pleasure, I had thought about translating this into English, but i couldn’t do justice and so i will not try and mutilate a work of art..
मुख्डा:
कभी पल्कॊ पे आन्सू हैं
कभि लब पे शिकायत हैं
मगर ऐ ज़िन्दगि फिर भि
मुझे तुझ से मौहब्बत [...]

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कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता हैं
कि ज़िंदगी तेरी जुल्फों कि नर्म छांव मैं गुजरने पाती
तो शादाब हो भी सकती थी।
यह रंज-ओ-ग़म कि सियाही जो दिल पे छाई हैं
तेरी नज़र कि शुओं मैं खो भी सकती थी।
मगर यह हो न सका और अब ये आलम हैं
कि तू नहीं, तेरा ग़म तेरी जुस्तजू भी नहीं।
गुज़र [...]

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A poor attempt to translate the feelings behind this beautiful ghazal by Mirza Ghalib. English cannot capture the intricacies of Urdu.

हज़ारों ख्ह्वाहिशें ऐसी की हर ख्ह्वाइश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अर्मां लेकिन फिर भी कम निकले

निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये हैं लेकिन
बहुत बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले

मुहब्बत में नहीन है [...]

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हमारी सांसौं मैं आज तक वोह हीना की खुश्भू मॆहक रही है
लबोन पे नग्मे मचल रहे है
नज़र से मस्ती झलक रही है

वोह मेरे नज़्दीक आते आते हया से इक दिन सिमट गये थे
मेरे खयालों में आज तक
वोह बदन कि डाली लटक रही है

सदा जो दिल से निकल रही है वोह शेर-ओ-नघ्मों मै ढल रही है
के [...]

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